---Advertisement---

आईएमटी रोजगार मेव किसान आंदोलन 2025: मुआवजा विवाद, बाहरी नेताओं पर बवाल और प्रशासन की सख्ती

By: Mohd Hafiz

On: Sunday, July 6, 2025 10:58 PM

Google News
Follow Us
---Advertisement---

आईएमटी रोजगार मेव किसान आंदोलन अब नए मोड़ पर है। जानिए क्यों किसानों का आंदोलन दो हिस्सों में बंट गया है, क्या हैं असली मांगें और कैसे प्रशासन व ग्रामीणों की भूमिका बन रही है चर्चा का विषय।

हरियाणा के नूंह जिले में चल रहा आईएमटी रोजगार मेव किसान आंदोलन अब तेजी से सुर्खियों में है। एक ओर जहां किसान अपने बकाया मुआवजे और अन्य अधिकारों के लिए सड़क पर हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीणों के विरोध ने आंदोलन को दो ध्रुवों में बांट दिया है।

किसानों की मुख्य मांगें क्या हैं?

किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठनों का कहना है कि उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया गया, और जो कुछ दिया गया वो भी जबरन हलफनामा भरवाकर लिया गया। किसानों की मांग है कि पुराने एग्रीमेंट को रद्द किया जाए और पुनः बातचीत शुरू हो।

READ MORE  Ahana Success Story: 30 की उम्र में अहाना ने कमा ल‍िए 100 करोड़, जाने केसे।

ग्रामीणों की शिकायतें

रविवार को स्थानीय ग्रामीणों का एक प्रतिनिधि मंडल उपायुक्त से मिला और ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि बाहरी किसान नेता आंदोलन को भटका रहे हैं और शांति भंग करना चाहते हैं। उनका कहना है कि यह आंदोलन अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया बल्कि इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।

imt rozka meo nuh
imt rozka meo nuh

धमकियों और आरोपों का दौर

किसान नेता रवि आजाद को जान से मारने और तेजाब फेंकने की धमकी मिलने पर पुलिस में शिकायत दी गई है। इस पर थाना प्रभारी ने आश्वासन दिया है कि उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं आंदोलनकारी किसानों ने ज्ञापन सौंपने वालों को “समाज का गद्दार” बताया और कहा कि वे केवल अपना हक मांग रहे हैं।

READ MORE  हरियाणा में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए सरकार ने स्थायी भर्ती के लिए दरवाजा खोले।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने साफ शब्दों में कहा है कि किसानों को आंदोलन छोड़कर क्षेत्रीय विकास पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुआवजे से जुड़े मामलों में अदालत का फैसला पहले ही हो चुका है, और अब उसका विरोध केवल विकास कार्यों में बाधा बन रहा है। प्रशासन की मंशा है कि स्थानीय युवाओं को स्किल्ड बनाया जाए ताकि उन्हें आईएमटी में रोजगार मिल सके।

क्यों उठ रहा है “बाहरी नेताओं” का मुद्दा?

आंदोलन में पंजाब, राजस्थान, यूपी और हरियाणा के अन्य जिलों से आए किसान नेताओं की मौजूदगी पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि इन बाहरी नेताओं की वजह से आंदोलन की दिशा बदल गई है, जबकि किसान नेताओं का कहना है कि वे पूरे देश में किसानों के लिए आवाज़ उठाते हैं और “बाहरी” कहना केवल राजनीति है।

READ MORE  IPL 2025: वसीम जाफर की बड़ी भविष्यवाणी, ये दो खिलाड़ी जीतेंगे ऑरेंज और पर्पल कैप!

अब तक क्या हुआ है?

मार्च से लेकर जुलाई तक प्रशासन और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। लेकिन समाधान अब तक नहीं निकल पाया। सरकार की ओर से बार-बार यह कहा गया है कि जो मांगें वैध हैं, उन पर विचार हुआ है, लेकिन कोर्ट द्वारा तय मुआवजे पर दोबारा बातचीत संभव नहीं है।

Mohd Hafiz

Mohd Hafiz is a Crypto News Analyst and Content Writer with over 2 years of experience in blogging and digital publishing. He covers Bitcoin, altcoins, crypto market trends, price predictions, and blockchain developments, providing readers with reliable and up-to-date cryptocurrency insights.
For Feedback - feedback@example.com

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a comment